जय गणेश देवा आरती
Jai Ganesh Deva Aarti — Lyrics & PDF
जय गणेश जय गणेश देवा से आरंभ होने वाली गणेश जी की आरती। इसमें मुख्य टेक और चार अंतरे हैं। क्षेत्र और गायन-परंपरा के अनुसार अतिरिक्त अंतरे भी प्रचलित हैं।
Roman पाठ IAST लिप्यंतरण है, अंग्रेज़ी अनुवाद नहीं। ā, ī, ū लंबे स्वर हैं; ś/ṣ का प्रयोग श/ष के लिए है।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा । लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa, jaya gaṇeśa devā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
eka daṃta dayāvaṃta, cāra bhujā dhārī | māthe siṃdūra sohe, mūse kī savārī ||
jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa, jaya gaṇeśa devā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
pāna car̤he phala car̤he, aura car̤he mevā | laḍḍuana kā bhoga lage, saṃta kareṃ sevā ||
jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa, jaya gaṇeśa devā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
aṃdhana ko āṃkha deta, kor̤hina ko kāyā | bāṃjhana ko putra deta, nirdhana ko māyā ||
jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa, jaya gaṇeśa devā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
sūra śyāma śaraṇa āe, saphala kīje sevā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
jaya gaṇeśa jaya gaṇeśa, jaya gaṇeśa devā | mātā jākī pārvatī, pitā mahādevā ||
गणेश पूजन की पारंपरिक हिंदी आरती; सूर श्याम नाम वाली प्रचलित समापन पंक्ति।
पाठ संदर्भ / Text reference
पारंपरिक पाठ का स्वतंत्र टंकण। वर्तनी और पाठांतर संभव हैं। जहाँ फलश्रुति है, वह मूल भक्ति-पाठ का भाग है।
पाठ नीति पढ़ेंपाठ से जुड़े प्रश्न
जय गणेश देवा आरती की PDF कैसे डाउनलोड करें?
ऊपर PDF डाउनलोड बटन चुनें। देवनागरी या Roman चुनने पर उसी लिपि की PDF मिलेगी।
क्या Roman पाठ अंग्रेज़ी अनुवाद है?
नहीं। यह IAST पद्धति में अक्षरों का लिप्यंतरण है, अर्थ का अनुवाद नहीं। हिंदी पदों में बोलचाल के उच्चारण और लिखित लिप्यंतरण में अंतर हो सकता है।
दूसरी पुस्तक में कुछ शब्द अलग क्यों हैं?
पारंपरिक पाठों में वर्तनी और मौखिक परंपरा के पाठांतर मिलते हैं। यहाँ स्रोत-परंपरा दी गई है; इसे किसी विशेष गायक की रिकॉर्डिंग का हूबहू प्रतिलेख न मानें।
