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राम • भजन

अबलौं नसानी अब न नसैहौं

Ab Lau Nasani Ab Na Nasaihon — Lyrics & PDF

राम के चरणों में मन लगाने के संकल्प का भजन। राम-कृपा भव-निसा सिरानी से पहचाना जाने वाला पूरा पद।

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अबलौं नसानी, अब न नसैहौं। राम-कृपा भव-निसा सिरानी, जागे फिरि न डसैहौं॥

पायेउँ नाम चारु चिंतामनि, उर कर तें न खसैहों। स्यामरूप सुचि रुचिर कसौटी, चित कंचनहिं कसैहौं॥

परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन, निज बस ह्वै न हँसैहौं। मन मधुकर पनकै तुलसी रघुपति-पद-कमल बसैहौं॥

रचना और पाठ-परंपरा

गोस्वामी तुलसीदास, विनय-पत्रिका का पद।
पाठ संदर्भ: विनय-पत्रिका पद

पारंपरिक पाठ का स्वतंत्र टंकण। वर्तनी और पाठांतर संभव हैं। जहाँ फलश्रुति है, वह मूल भक्ति-पाठ का भाग है।

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पाठ से जुड़े प्रश्न

अबलौं नसानी अब न नसैहौं की PDF कैसे डाउनलोड करें?

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क्या Roman पाठ अंग्रेज़ी अनुवाद है?

नहीं। यह IAST पद्धति में अक्षरों का लिप्यंतरण है, अर्थ का अनुवाद नहीं। हिंदी पदों में बोलचाल के उच्चारण और लिखित लिप्यंतरण में अंतर हो सकता है।

दूसरी पुस्तक में कुछ शब्द अलग क्यों हैं?

पारंपरिक पाठों में वर्तनी और मौखिक परंपरा के पाठांतर मिलते हैं। यहाँ स्रोत-परंपरा दी गई है; इसे किसी विशेष गायक की रिकॉर्डिंग का हूबहू प्रतिलेख न मानें।