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कृष्ण • भजन

जसोदा हरि पालनैं झुलावै

Jasoda Hari Palne Jhulawe — Lyrics & PDF

बालकृष्ण को पालने में झुलाती यशोदा का लोरी-भाव वाला भजन। चार पद-युग्मों में वात्सल्य का चित्रण।

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जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै, दुलरावै मल्हावै, जोइ-जोइ कछु गावै॥

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहैं न आनि सुवावै। तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरैं गावै। जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नंद-भामिनि पावै॥

रचना और पाठ-परंपरा

सूरदास का पारंपरिक ब्रजभाषा पद।
पाठ संदर्भ: सूरदास का पद

पारंपरिक पाठ का स्वतंत्र टंकण। वर्तनी और पाठांतर संभव हैं। जहाँ फलश्रुति है, वह मूल भक्ति-पाठ का भाग है।

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पाठ से जुड़े प्रश्न

जसोदा हरि पालनैं झुलावै की PDF कैसे डाउनलोड करें?

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क्या Roman पाठ अंग्रेज़ी अनुवाद है?

नहीं। यह IAST पद्धति में अक्षरों का लिप्यंतरण है, अर्थ का अनुवाद नहीं। हिंदी पदों में बोलचाल के उच्चारण और लिखित लिप्यंतरण में अंतर हो सकता है।

दूसरी पुस्तक में कुछ शब्द अलग क्यों हैं?

पारंपरिक पाठों में वर्तनी और मौखिक परंपरा के पाठांतर मिलते हैं। यहाँ स्रोत-परंपरा दी गई है; इसे किसी विशेष गायक की रिकॉर्डिंग का हूबहू प्रतिलेख न मानें।