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कृष्ण • भजन

मेरे तो गिरधर गोपाल

Mere To Girdhar Gopal — Lyrics & PDF

मीरा की कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ भक्ति व्यक्त करने वाला पद। मौखिक परंपरा के कारण इसके अंतरों और शब्दों के कई पाठ मिलते हैं।

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मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई। छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई॥

संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई। चुनरी के किये टूक, ओढ़ लीन्ही लोई॥

अँसुवन जल सींचि सींचि, प्रेम बेलि बोई। अब तो बेलि फैल गई, आनंद फल होई॥

दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई। दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दई छोई॥

भगत देख राजी हुई, जगत देख रोई। दासी मीरा लाल गिरधर, तारो अब मोही॥

रचना और पाठ-परंपरा

मीराबाई; प्रचलित पारंपरिक पद

पारंपरिक पाठ का स्वतंत्र टंकण। वर्तनी और पाठांतर संभव हैं। जहाँ फलश्रुति है, वह मूल भक्ति-पाठ का भाग है।

पाठ नीति पढ़ें

पाठ से जुड़े प्रश्न

मेरे तो गिरधर गोपाल की PDF कैसे डाउनलोड करें?

ऊपर PDF डाउनलोड बटन चुनें। देवनागरी या Roman चुनने पर उसी लिपि की PDF मिलेगी।

क्या Roman पाठ अंग्रेज़ी अनुवाद है?

नहीं। यह IAST पद्धति में अक्षरों का लिप्यंतरण है, अर्थ का अनुवाद नहीं। हिंदी पदों में बोलचाल के उच्चारण और लिखित लिप्यंतरण में अंतर हो सकता है।

दूसरी पुस्तक में कुछ शब्द अलग क्यों हैं?

पारंपरिक पाठों में वर्तनी और मौखिक परंपरा के पाठांतर मिलते हैं। यहाँ स्रोत-परंपरा दी गई है; इसे किसी विशेष गायक की रिकॉर्डिंग का हूबहू प्रतिलेख न मानें।