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कृष्ण • भजन

मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ

Maiya Mohi Dau Bahut Khijhayo — Lyrics & PDF

दाऊ की छेड़छाड़ की शिकायत करते बालकृष्ण का वात्सल्य भजन। यशोदा के आश्वासन तक पूरा पद पढ़ें।

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मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ। मोसौं कहत मोल कौ लीन्हौ, तू जसुमति कब जायौ?

कहा करौं इहि रिस के मारैं खेलन हौं नहिं जात। पुनि-पुनि कहत कौन है माता को है तेरौ तात॥

गोरे नंद जसोदा गोरी, तू कत स्यामल गात। चुटुकी दै-दै ग्वाल नवावत, हँसत, सबै मुसुकात॥

तू मोही कौं मारन सीखी, दाउहि कबहुँ न खीझै। मोहन-मुख रिस की ये बातैं, जसुमति सुनि-सुनि रीझै॥

सुनहु कान्ह, बलभद्र चबाई, जनमत ही कौ धूत। सूर स्याम मोहि गोधन की सौं, हौं माता तू पूत॥

रचना और पाठ-परंपरा

सूरदास का पारंपरिक ब्रजभाषा पद।
पाठ संदर्भ: सूरदास का पद

पारंपरिक पाठ का स्वतंत्र टंकण। वर्तनी और पाठांतर संभव हैं। जहाँ फलश्रुति है, वह मूल भक्ति-पाठ का भाग है।

पाठ नीति पढ़ें

पाठ से जुड़े प्रश्न

मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ की PDF कैसे डाउनलोड करें?

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क्या Roman पाठ अंग्रेज़ी अनुवाद है?

नहीं। यह IAST पद्धति में अक्षरों का लिप्यंतरण है, अर्थ का अनुवाद नहीं। हिंदी पदों में बोलचाल के उच्चारण और लिखित लिप्यंतरण में अंतर हो सकता है।

दूसरी पुस्तक में कुछ शब्द अलग क्यों हैं?

पारंपरिक पाठों में वर्तनी और मौखिक परंपरा के पाठांतर मिलते हैं। यहाँ स्रोत-परंपरा दी गई है; इसे किसी विशेष गायक की रिकॉर्डिंग का हूबहू प्रतिलेख न मानें।